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Tuesday, 9 December 2025

प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन: कारण, लक्षण और होम्योपैथी उपचार




प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन: कारण, लक्षण और होम्योपैथी उपचार

डॉ. अंकुश पवार – होम्योपैथिक कंसल्टेंट, केसुला क्लिनिक, परभणी


पुरुषों में पाई जाने वाली सबसे आम लेकिन सबसे ज्यादा छुपाई जाने वाली लैंगिक समस्याओं में से एक है प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन (PE)
कई पुरुष शर्म या झिझक की वजह से इस बारे में बात नहीं कर पाते, लेकिन सही जांच, उपचार और मार्गदर्शन से यह समस्या पूरी तरह नियंत्रित की जा सकती है।

केसुला क्लिनिक में हम सुरक्षित, प्राकृतिक और व्यक्तिगत होम्योपैथी उपचार के माध्यम से पुरुषों को आत्मविश्वास वापस पाने में मदद करते हैं।


प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन क्या है?

संभोग की शुरुआत होते ही या कभी-कभी उससे पहले ही बहुत जल्दी वीर्यस्खलन हो जाना—इसे प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन कहा जाता है।
यह पुरुष की आत्मविश्वास, संतुष्टि और दांपत्य जीवन को प्रभावित कर सकता है।


प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन के मुख्य लक्षण

  • संभोग के दौरान बहुत जल्दी वीर्यस्खलन होना
  • स्खलन पर नियंत्रण न होना
  • यौन संतुष्टि में कमी
  • प्रदर्शन को लेकर डर या दवाब
  • तनाव, अपराधबोध या निराशा महसूस होना

प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन के कारण

इस समस्या के पीछे शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली से जुड़े कई कारण हो सकते हैं।

शारीरिक कारण

  • जननांग की अत्यधिक संवेदनशीलता
  • हार्मोनल असंतुलन
  • प्रोस्टेट या जननांग में सूजन
  • थायरॉइड विकार
  • Erectile Dysfunction का इतिहास

मानसिक कारण

  • प्रदर्शन का दबाव
  • तनाव व चिंता
  • संबंधों में तकरार
  • आत्मविश्वास की कमी
  • पुराने नकारात्मक यौन अनुभव

होम्योपैथी से प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन का इलाज क्यों?

होम्योपैथी सिर्फ लक्षण नहीं दबाती, बल्कि समस्या के मूल कारण को ठीक करने का प्रयास करती है।

✔️ सुरक्षित और प्राकृतिक
✔️ बिना किसी साइड-इफेक्ट
✔️ नॉन-हॉर्मोनल
✔️ हर मरीज के हिसाब से अलग दवा

होम्योपैथी नसों की शक्ति बढ़ाती है, संवेदनशीलता कम करती है, मानसिक तनाव घटाती है और यौन आत्मविश्वास में सुधार करती है।


केसुला क्लिनिक में PE का उपचार कैसे किया जाता है?

1. विस्तृत केस-स्टडी

मरीज की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और जीवनशैली से जुड़ी सभी चीजों का गहराई से विश्लेषण होता है।

2. व्यक्तिगत होम्योपैथिक दवाएं

हर मरीज का कारण अलग होता है, इसलिए दवाएं भी पूरी तरह व्यक्तिगत होती हैं।

3. जीवनशैली + मानसिक सपोर्ट

  • तनाव कम करने की तकनीक
  • स्वस्थ यौन आदतें
  • पेल्विक मसल्स मजबूत करना
  • संपूर्ण स्वास्थ्य सुधार

4. पूरी तरह गोपनीय उपचार

आपकी हर जानकारी सुरक्षित और गोपनीय रखी जाती है।


उपचार के बाद मिलने वाले परिणाम

✔️ स्खलन पर बेहतर नियंत्रण
✔️ यौन स्टैमिना में वृद्धि
✔️ चिंता और तनाव में कमी
✔️ संबंधों में सुधार
✔️ आत्मविश्वास में बढ़ोतरी

नोट: सुधार मरीज-दर-मरीज भिन्न हो सकता है।


डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

  • यदि समस्या बार-बार हो रही है
  • यदि यह संबंधों को प्रभावित कर रही है
  • यदि मानसिक तनाव बढ़ रहा है
  • यदि आप सुरक्षित और लंबी-अवधि का समाधान चाहते हैं

प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन कोई कमजोरी नहीं—यह एक उपचार योग्य स्थिति है।


डॉ. अंकुश पवार का संदेश

प्रीमॅच्योर इजैक्युलेशन पूरी तरह ठीक हो सकता है।
सही होम्योपैथिक इलाज से पुरुष अपने यौन जीवन में फिर से आत्मविश्वास और संतुलन पा सकते हैं।
समस्या को नजरअंदाज न करें—समय पर इलाज बहुत जरूरी है।


📍 केसुला होम्योपैथी क्लिनिक

होम्योपैथिक कंसल्टेंट – डॉ. अंकुश पवार
शिवराम नगर, वसमत रोड, परभणी – 431401
📞 संपर्क: 9730553554


Friday, 18 November 2016

महिलाओं की सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं और उनका उपचार

पुरुषों के समान महिलाओं की भी सेक्‍स इच्‍छा होती है। अधूरा और सही समय पर संभोग के पूरा न होने पर महिलाओं को शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है। स्त्रियों का सेक्‍स केवल संभोग तक सीमित नहीं होता बल्कि स्पर्श चुंबन आदि से भी उन्‍हें संतुष्टि मिल जाती है। सेक्स का सेंटर दिमाग में होता है। चुंबन स्पर्श या सेक्‍स के ख्‍याल से शरीर में उत्‍तेजना पैदा होती है जिससे पूरे शरीर में खून का बहाव बढ़ जाता है। स्त्री जननांग बेहद संवेदनशील होता है। उत्‍तेजना होते ही स्त्रियों की योनी गीली हो उठती है। जिसे ऑर्गेज्म क्लाइमैक्स या चरम सुख कहा जाता है- वह बेहद कम महिलाओं को नसीब हो पाता है। ऐसा सेक्‍स के प्रति अज्ञानता और पुरुष का सही साथ नहीं मिलने की वजह से होता है। सेक्‍स की वजह से सेक्‍स के दौरान या सेक्‍स के बाद महिलाओं में आने वाली समस्‍याओं को समझ कर उसका समाधान किया जा सकता है।

 कामेच्छा में कमी- बहुत-सी महिलाओं को सेक्स की चाहत ही नहीं होती। अगर वे पार्टनर के कहने पर तैयार होती हैं तो भी बिल्कुल ऐक्टिव नहीं हो पातीं। बस अपनी ड्यूटी समझकर काम निबटा देती हैं। बच्चे होने के बाद यह समस्या ज्यादा होती है।
वजह : डिप्रेशन थकान या तनाव की वजह से यह दिक्कत हो सकती है। कई बार बचपन की किसी बुरी घटना की वजह से भी सेक्स में दिलचस्पी खत्म हो जाती है। इसके अलावा कुछ और वजहें भी सकती हैं मसलन पार्टनर जिस तरह छूता है वह पसंद नहीं आना, उसके शरीर की महक नापसंद होना, उसे बहुत ज्यादा पसीना आना, उसके मुंह से पान-तंबाकू वगैरह की बदबू आना आदि। कई महिलाओं को शरीर के कुछ खास हिस्सों पर हाथ लगाने से दर्द महसूस होता है या अच्छा नहीं लगता। इससे भी वे सेक्स से बचने लगती हैं।
इलाज : पार्टनर को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि साथी महिला को क्या पसंद है और क्या नापसंद। उसी के मुताबिक आगे बढ़ना चाहिए। फोर प्ले में ज्यादा वक्त बिताना चाहिए। इससे महिला मानसिक और शारीरिक रूप से संभोग के लिए तैयार हो जाती है। जब एक्साइटमेंट ज्यादा हो तभी आगे बढ़ना चाहिए। अगर डिप्रेशन की वजह से दिक्कत है तो पहले उसका इलाज कराएं। डिप्रेशन से मुक्त होने पर हीकामेच्छा जागेगी।
सेंसेट फोकस एक्सरसाइज या प्लेजरिंग सेशन से काफी फायदा हो सकता है। इस सेशन में स्पर्श पर सारा फोकस होता है और सहवास की मनाही होती है। इसका तरीका यह है कि बारी-बारी से स्त्री व पुरुष एक-दूसरे को प्यार से सहलाएं और एक-दूसरे के शरीर पर उत्तेजना केंद्र खोजें। दोनों एक-दूसरे को बताएं कि उन्हें कहां अच्छा लगता है। इससे महिलाओं की झिझक भी कम होती है। साथ ही परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं होता। वे कपल जिन्हें कोई दिक्कत नहीं है वे भी तीन-चारमहीनों में अगर एक हफ्ते इस सेशन को करें और सहवास से परहेज रखें तो सेक्सलाइफ को ज्यादा इंजॉय कर सकते हैं।


लुब्रिकेशन की कमी- स्त्री जनन अंग में लुब्रिकेशन (गीलापन) को उत्तेजना का पैमाना माना जाता है। कुछ महिलाओं को इसमें कमी की शिकायत होती है। ऐसे में सहवास काफी तकलीफदेह हो जाता है।
वजह : लुब्रिकेशन में कमी तीन वजहों से हो सकती है। इन्फेक्शन, हार्मोंस में गड़बड़ी या फिर सही तरीके से फोर प्ले न होना। अगर जनन अंग में खुजली हो, खून आता हो, कपड़े पर धब्बे पड़ जाते हों या बहुत बदबू आती हो तो इन्फेक्शन हो सकता है। हार्मोंस में गड़बड़ी यानी एस्ट्रोजन की कमी आमतौर पर मीनोपॉज के बाद ज्यादा होती है। पार्टनर का महिला की जरूरत न समझ पाना या फोर प्ले मेंज्यादा वक्त न गुजारना भी इसकी वजह हो सकती है।
इलाज : अगर इन्फेक्शन है या हॉर्मोंस में गड़बड़ी है तो फौरन अच्छे डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराएं। हॉर्मोंस वाली दिक्कत अक्सर मरीज को खुद पता नहीं लगती। डॉक्टर जांच के बाद इसका पता लगा पाते हैं। तीसरी वजह है तो पार्टनर से बातचीत और समझ से प्रॉब्लम दूर की जा सकती है। पार्टनर को फोरप्ले में ज्यादा वक्त देना चाहिए क्योंकि यह बहुत अहम होता है। इसी से सेक्स को सही ढंग सेइंजॉय किया जा सकता है।


सहवास में दर्द- कुछ महिलाओं को सहवास के दौरान दर्द होता है। कई बार यह दर्द बहुत ज्यादा होता है और ऐसे में महिला सेक्स से बचने लगती है। साथी को इस दर्द का अहसास नहीं होता। उसे लगता है कि साथी महिला उसे सहयोग नहीं दे रही। यह दोनों के बीच झगड़े की वजह बनता है। इस प्रॉब्लम को डिस्परयूनिया (पेनफुल इंटरकोर्स) कहा जाता है। अगर पूरे इलाज या सलाह के बिना संबंध बनाने की कोशिश की जाती है तो प्रॉब्लम और बढ़ जाती है।
वजह : संबंध बनाते वक्त दर्द की वजह लुब्रिकेशन में कमी या सही ढंग से फोर प्ले न होना हो सकता है। कई बार इन्फेक्शन या एंडोमेट्रियोसिस यानी ओवरी में ब्लड जमा होने पर यह प्रॉब्लम हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस के लिए हॉर्मोन थेरपी या फिर जरूरत पड़ने पर लेप्रोस्कोपी भी की जाती है।


 वैजिनिस्मस : वैजिनिस्मस का मतलब है किसी बाहरी चीज के स्त्री जनन अंग में जाने का डर। इसमें संभोग की कोशिश या संभावना का आभास मिलते ही महिला जनन अंग के बाहरी एक-तिहाई हिस्से में अनैच्छिक संकुचन आ जाता है। इससे समागम नहीं हो पाता और साथी अगर जबरन कोशिश करता है तो दिक्कत और दर्द दोनों बढ़ जाते हैं।
वजह : इसके मानसिक कारण होते हैं - जैसे कि कई बार महिला के मन में सहवास को लेकर डर बैठ जाता है कि इस दौरान काफी दर्द होता है। इसके अलावा किसी तरह की जोर-जबरदस्ती सेक्स को पाप या गलत समझने और अपने जननांगों को गंदे या बदबूदार मानने की भावना से भी यह परेशानी हो सकती है।
इलाज : इस परेशानी की कोई दवा या सर्जरी नहीं होती। यह मानसिक बीमारी है और इसे काउंसलिंग से बहुत हद तक सुधारा जा सकता है। पीड़ित महिला के मन से सेक्स संबंधी डर दूर किया जाता है। उसे समझाया जाता है कि जनन अंग इलास्टिक की तरह होता है जो जरूरत के मुताबिक बढ़ जाता है। इससे उसके दिमाग से काफी हद तक फिक्र निकल जाती है और वह मानसिक तौर पर राहत महसूस करने लगती है। इसके बाद एक खास थेरपी के जरिए जनन अंग को धीरे-धीरे बाहरी चीज के टच के प्रति सहज किया जाता है। फिर डाइलेटर की मदद से ज्यादा जगह बनाई जाती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज भी की जा सकती है। इसका तरीका यह है कि महिला पेशाब को रोके और छोड़ दे। फिर रोके, फिर छोड़ दे। इस तरह जनन अंग पर उसका कंट्रोल बढ़ जाता है।
सलाह : डॉक्टर कहते हैं कि संबंध कायम करने के दौरान प्रवेश का काम औरत को ही करना चाहिए क्योंकि उसे ही मालूम है कि वह कब तैयार है। ऐसे में उसे संबंध के दौरान दर्द नहीं झेलना पड़ेगा।


क्लाइमैक्स न होना या देर से होना- महिलाओं में यह शिकायत आम है कि उनका पार्टनर उन्हें संतुष्ट किए बिना ही छोड़ देता है। कुछ को ऑर्गेज्म (क्लाइमैक्स) नहीं होता और कुछ को होता है पर महसूस नहीं होता। कुछ महिलाओं को लुब्रिकेशन के दौरान ही जल्दी क्लाइमैक्स हो जाता है। कुछ को बहुत देर से क्लाइमैक्स होता है। असल में क्लाइमैक्स के दौरान महिला को अपने जनन अंग में लयात्मक संकुचन महसूस होता है और फिर मन एकदम शांत हो जाता है। लेकिन लयात्मक संकुचन 10 में से 8 महिलाओं को ही होता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि बाकी दो को क्लाइमैक्स नहीं होता। उन्हें भी क्लाइमैक्स होता है बस अहसास नहीं होता। वैसे कुछमहिलाओं में पुरुषों की प्रीमैच्योर इजाकुलेशन की तरह शीघ्र क्लाइमैक्स होता है।
वजह : इस समस्या की वजह महिला खुद और साथी दोनों हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि अपने पार्टनर को संतुष्ट करना ही उसकी जिम्मेदारी है। इस सोच की वजह से वह अपनी इच्छा बता नहीं पाती। दूसरी ओर पुरुष भी कई बार खुद संतुष्ट होने के बाद महिला साथी के बारे में सोचता ही नहीं है।
इलाज : महिला अपनी झिझक खत्म करे और साथी को बताए कि वह संतुष्ट हुई या नहीं। ऐसे मुकाम पर पहुंचना जरूरी है जहां पूरी तरह संतुष्टि महसूस हो। पुरुष को अपनी पार्टनर की इच्छा समझनी चाहिए। वैसे भी कहा जाता है कि उत्तम पुरुष वह है जो महिला के कहे बिना ही उसकी बात समझ कर उसे संतुष्ट करे। मध्यम पुरुष वह है जो कहने पर उसे संतुष्ट करे और अधम पुरुष वह है जो कहने के बावजूद उसे असंतुष्ट छोड़ दे।


 मीनोपॉज- आमतौर पर मीनोपॉज हो जाने पर कुछ महिलाओं में सेक्स की इच्छा काफी घट जाती है। लुब्रिकेशन भी कम हो जाता है। इससे संबंध बनाते हुए तकलीफ होती है। जाहिर है महिला इससे बचने की कोशिश करने लगती है।
वजह : हॉर्मोंस में बदलाव की वजह से ऐसा होता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में सेक्स हॉर्मोन का लेवल काफी कम हो जाता है।
इलाज : फोर-प्ले में ज्यादा वक्त बिताएं। इससे नेचरल लुब्रिकेशन होता है। जरूरत पड़े तो बाहरी लुब्रिकेशन का इस्तेमाल करें। नारियल तेल अच्छा ऑप्शन हो सकता है। जरूरत पड़ने एस्ट्रोजन क्रीम का इस्तेमाल कर सकती हैं। मीनोपॉज हो जाने पर ऐसी डाइट लें जिसमें एस्ट्रोजन ज्यादा हो जैसे सोयाबीन, हरी सब्जियां, उड़द,राजमा आदि। डॉक्टर की सलाह पर सिंथेटिक एस्ट्रोजन की गोलियां भी ले सकती हैं।


 पीरियड्स के दौरान सेक्स- अगर दोनों को इच्छा हो तो पीरियड्स के दौरान भी सेक्स कर सकते हैं बल्कि कुछ लोग तो इसे ज्यादा सेफ मानते हैं क्योंकि इस दौरान प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। साथ हीपहले से ही गीलापन होने से आसानी भी होती है।लेकिन कुछ लोग इसे हाइजिनिक नहीं मानते। ऐसे में कॉन्डोम का इस्तेमाल बेहतर है।


मास्टरबेशन- पुरुषों की तरह महिलाएं भी खुद को संतुष्ट करने के लिए मास्टरबेशन करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक करीब 50 फीसदी महिलाएं ऐसा करती हैं। इसका कोई नुकसान नहीं है बल्कि एक्सपर्ट्स इसे बेहतर ही मानते हैं क्योंकि एक तोइसमें प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते। दूसरे इसमें कोई दूसरा शख्स अपनी पसंद-नापसंद को महिला पर थोप नहीं पाता। तीसरा एसटीडी (सेक्स ट्रांसमिटेड डिजीज) और एड्स की आशंका नहीं होती।


वैजाइनल पेन (वुलवुडेनिया पेल्विक पेन)- कभी-कभी महिलाओं को नाभि के नीचे और प्यूबिक एरिया के आसपास दर्द महसूस होता है। यह दर्द वैसा ही होता है जैसा पीरियड्स के दौरान होता है। इसकी वजह यह है कि उत्तेजना होने पर प्राइवेट पार्ट के आसपास खून का बहाव होता है। ऐसे में लुब्रिकेशन होता है पर क्लाइमैक्स नहीं होता। इससे इस एरिया में खून जम जाता है और दर्द होने लगता है। ऐसे में संतुष्टहोना जरूरी है फिर चाहे महिला खुद संतुष्ट हो या पुरुष उसे संतुष्ट करे। ऐसा न होने पर दर्द होता रह सकता है और महिला चिड़चिड़ी हो सकती है।


लेक्स पैरिनियम- मैक्स हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुराधा कपूर के मुताबिक उम्र बढ़ने और बच्चे होने के बाद कुछ महिलाओं का जनन अंग ढीला पड़ जाता हैजिससे दोनों को पूरी संतुष्टि का अहसास नहीं होता। आमतौर पर यह समस्या 40 साल के आसपास और दो-तीन बच्चे होने पर होती है। इसके लिए कीजल एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर सर्जरी (वैजाइनोप्लास्टी) की जाती है। चार हफ्ते तक कीजल एक्सरसाइज करने से स्त्री जनन अंग में कसाव आने लगता है।


जी स्पॉट : महिला जनन अंग में एक ऐसा क्षेत्र होता है, जहां सेक्स संबंधी संवेदनशीलता ज्यादा होती है। यह स्पॉट दो इंच की गहराई पर होता है। उत्तेजना बढ़ने पर यह स्पॉट थोड़ा फूल जाता है या कठोर हो जाता है। महिला को सबसे ज्यादा संतुष्टि इसी स्पॉट के छुए जाने पर होती है।


**स्‍त्री सेक्‍स मिथ और सच्‍चाई**

 महिलाओं को सेक्स की इच्छा कम होती है - महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सेक्स की इच्छा होती है। बच्चे होने के बाद भी कमी नहीं होती हालांकि कई बार परफॉर्मेंस में कमी आ जाती है। इसकी शारीरिक और मानसिक दोनों वजहें होती हैं।

पहली बार सेक्स करते हुए ब्लड निकलना ही चाहिए- लोग मानते हैं अगर महिला वर्जिन है तो पहली बार सेक्स के दौरान इसे ब्लीडिंग होनी ही चाहिए। यह सच नहीं है क्योंकि कुछ खेलकूद या साइfकल चलाते वक्त भी कुछ महिलाओं की हाइमेन टूट सकती है। ऐसे में पहली बार सहवास के दौरान ब्लड नहीं निकलता।

महिलाओं को भी पुरुषों की तरह डिस्चार्ज होता है- महिलाओं में पुरुषों की तरह डिस्चार्ज नहीं होता। 100 में से बमुश्किल एक महिला को थोड़ा-बहुत डिस्चार्ज होता है। उत्तेजना के दौरान होने वाले लुब्रिकेशन को ही ज्यादातर लोग डिस्चार्ज समझ लेते हैं। हालांकि डिस्चार्ज होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि महिला को असली सुकून क्लाइमैक्स पर पहुंचने से ही मिलता है।

महिलाएं चरम पर नहीं पहुंचती हैं-  यह पूरी तरह गलत है। महिलाएं भी संभोग के दौरान चरम पर पहुंचती हैं। ऐसे में पुरुष का उसकी जरूरत को समझना औरउसके मुताबिक परफॉर्मेंस देना जरूरी है।

चरम पर पहुंचने में महिलाओं को ज्यादा वक्त लगता हैसभी महिलाएं सेक्‍स के चरम पर पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लेतीं। अगर पार्टनर उनकी पसंद का है तो वे जल्दी मुकाम पर पहुंच जाती हैं। हालांकि कुछ को ज्यादा वक्त भी लग सकता है।

  (टिप- यह जानकारी सिर्फ संदर्भ के लिये दि गयी कोई भी दवा लेने से पूर्व डॉक्टर कि सलाह आवश्यक है)

सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं की  संपूर्ण जानकारी  या  ट्रीटमेंट के लिये संपर्क करे-

Consulting Homoeopath
Contact- (+91) 9730553554

Smruti Niwas,Shivram Nagar,
Vasmat Road,Opp.Chintamani Mandir,
Parbhani-431401 (MAHARASHTRA) INDIA

Monday, 5 January 2015

नपुंसकता (IMPOTENCE)

 जीवन को सफल बनाने के लिए सेक्स ही सबसे सरल साधन है। स्त्री-पुरुष विवाह के बाद सेक्स संबंध बनाकर अपने प्रेम को बहुत अधिक ताकतवरतथा आनंददायक बना लेते हैं। लेकिन कई बार ऐसा वक्त भी आता है कि उनके सफल जीवन में सेक्स करने की क्षमता न होने के कारण आनंद नहीं मिल पाता है। कई पुरुष एक बार के सेक्स में असफल हो जाने के कारण अपने आप को नपुंसक मानकर वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और वे अपने मन में नपुंसकता का डर पैदा करके बुरी तरह से बेचैन और तनाव से भर जाते हैं। मेडिकल के अंदर नपुंसकता को इंपोटेंसी भी कह सकते हैं। इस रोग में व्यक्ति मन के अंदर सेक्स के बारे में गलत विचार बनाए रखने की वजह से अपनी स्त्री को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है। इस समय में युवा पुरुष सब से ज्यादा इंपोटेंसी जैसे रोग से ही पीड़ित हैं। दूसरी तरह की नपुंसकता को इनफर्टिलिटी यानि नपुंसकता कहा जा सकता है। इसके अंदर पुरुष अपनी स्त्री को संभोग क्रिया करके उनको संतुष्ट तो कर देगें मगर उन पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की मात्रा कम होने की वजह से या बिल्कुल भी न होने की वजह से वे संतान पैदा नहीं कर सकते हैं या वे संतान पैदा करने में नाकाम रहते हैं।

इनफर्टिलिटी के कारणः-

इनफर्टिलिटी के कई कारण होते हैं, लेकिन इन तीन कारणों की वजह से मनुष्य में इनफर्टिलिटी की परेशानी पैदा हो जाती है-
*.यौनांग संबंधी गड़बड़ी ।
*.यौनांग में पूर्ण तनाव न आना ।
*.वीर्य में शुक्राणुओं का अभाव ।

1.यौनांग संबंधी गड़बड़ी-यौनांग संबंधी गड़बड़ी निम्नलिखित कारणों की वजह से हो सकती है-

*.शिश्न (लिंग) का बहुत ही छोटा होना।
*.अण्डकोष बहुत ही नरम तथा छोटे होना।
*.लिंग का टेढा होना।
*.अण्डकोष का पेट में धंसा होना।
*.वे पुरुष जिसके अंदर स्त्रियों वाले गुण हो।

2. यौनांग में पूरी तरह से तनाव न आना-

यौनांग में पूरी तरह से तनाव नहीं आता हैं जिसके कई कारण हैं जैसे-
नशीले पदार्थोंका सेवन करना,
किसी भी तरह का कोई भी तनाव,
पागलपन की अवस्था,
बहुत अधिक शारीरिक तथा मानसिक मेहनत करना,
अधिक मात्रा में धूम्रपान करना,
सिर पर गहरी चोट लगना या कोई सदमा लगना,
नरवस सिस्टम में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाना तथा हार्मोन के बिगड़ जाने की वजह के कारण से भी लिंग (शिश्न) में बिल्कुल भी तनाव पैदा नहीं होता हैं। इसके विपरीत नींद न आना, उच्च रक्तचाप, पागलपन का होना तथा अल्सर आदि की दवाओं का रोजाना इस्तेमाल करने से, पुरुष में किसी भी तरह की कमी होने पर, प्रोस्टेट ग्लैंड या मूत्रनली के रोग तथा सिफलिस जैसे यौन रोग होने के कारण शिश्न में पूरी तरह से उत्तेजना नहीं होने के कारण कई बार मनुष्य अच्छी तरह से संभोग क्रिया नहीं कर पाता और वह नपुंसकता का शिकार हो जाता है।

3.वीर्य में शुक्राणुओं की कमीः-

कई बार पुरुष बच्चे पैदा करने में सफल नहीं हो पाता है क्योंकि उनके वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होती है। पुरुष के वीर्य के अंदर शुक्राणुओं की कमी होने के कई कारण होते हैं जैसे- पुरुष के लिंग के अंदर संक्रमण होने के कारण,शुक्रवाहिनीमें कोई रूकावट होने के कारण, तपती धूप में कार्य करने के कारण, शुक्राणुओं का सही तरीके से तैयार न होने के कारण तथा कई और अन्य प्रकार के प्रभावों की वजह से भी शुक्राणुओं की कमी हो जाती है।

इनफर्टिलिटी की जांचः-

जब कोई स्वस्थ पुरुष सेक्स क्रिया करने के बाद अपने वीर्य को निकालता है तो उसका लगभग 3 से लेकर 5 मिलीलीटर तक वीर्य बाहर आता है। जब मनुष्य का वीर्य निकलता है तो उस वीर्य में कम से कम 8 से लेकर 10 करोड़ शुक्राणु होते हैं। वीर्य में 40 प्रतिशत से अधिक शुक्राणु पुरुष के बीमार होने, वीर्य की मात्रा एक मिलीलीटर से अधिक कम होने से, कमजोर होने से, वीर्य में मवाद पड़ जाने से तथा वीर्य में खून होने से भी वीर्य को सही नहीं माना जाता है या बेकार माना जाता है। पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की मात्रा कितनी है इसके बारे  में वीर्य की जांच करवाने से ही पता लगाया जा सकता है। शुक्राणुओं की मात्रा के बारे में पता करने के लिए स्त्री-पुरुष के संभोग करने के बाद स्त्री के योनिमुख के द्वार से वीर्य को लेकर उसकी जांच के द्वारा पता लगाया जाता है। इस तरह से शुक्राणुओं की सही मात्रा के बारे में मालूम हो जाता है। इससे यह भी पता चल जाता है कि वीर्य ने योनि की नली के अंदर प्रवेश किया है या नहीं किया है। इस तरह से सही ढ़ग से सेक्स क्रिया करने के बारे में भी मालूम हो जाता है।
वीर्य में शुक्राणुओं की कमी के बारे में पता लगाने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है-
1. शुक्रवाहिनी का एक्स-रे,
2. अण्डकोषों की बायोप्सी,
3. हार्मोन टेस्ट।
शुक्राणुओं की कमी के बारे में मालूम हो जाने पर इसका इलाज करवाना शुरु कर देना चाहिए। अगर पुरुष केप्रोस्टेट ग्लैंड, अण्डकोष तथा लिंग (शिश्न) के अंदर किसी भी प्रकार की कोई कमी हो तो शीघ्र ही उसे सर्जरीकरवा कर समाप्त किया जा सकता है। माइक्रो सर्जरी के द्वारा भी शुक्रवाहिनी के अंदर कोई रूकावट हो तो वो भी ठीक हो जाती है।जिन पुरुषों को संतान नहीं होती है उन पुरुषों को चाहिए कि वे अपनी पत्नी के साथ-साथ स्वयं की भी जांच करवा ले तो इससे इनफर्टिलिटी के सही कारणों के बारे में मालूम हो जाएगा।

इंपोटेंसी के कारणः

अगर किसी वजह से पुरुष के लिंग की नलियों के अंदर किसी तरह की कोई भी कमी हो जाए तो उसके लिंग (शिश्न) के अंदर तनाव उत्पन्न होना बंद हो जाता है। पुरुष की उम्र के साथ ही साथ उसके शरीर की कोशिकाओं के अंदर ताकत समाप्त होती जाती है। युवावस्था में पुरुष के शिश्नके अंदर तनाव जल्दी ही पैदा हो जाता है तथाबुढ़ापे की अवस्थामें तनाव बहुत ही देरी से होता है। युवावस्था के अंदर दिल काफी ताकतवरहोता है तथा शरीर के अंदर के खून का उतार-चढाव अधिक तेजी से होता है और उनके शरीरमें हार्मोन भी ठीक प्रकार से अधिक मात्रा में बनते रहते हैं, इसलिए युवावस्था में लिंग(शिश्न) का तनाव सही रूप से होता है। इसके विपरीत प्रौढ़ावस्था में शरीर के काम करने की क्रिया ढीली पड़ जाती है तथा उनके खून का उतार-चढाव कम हो जाताहै और लिंग के अंदरूनी अंगों की दीवारे सख्त हो जाती है। इस वजह से शरीर की नसों के अंदर खून का उतार-चढाव पूर्णरूप से नहीं हो पाता है जिसकी वजह से शिश्न (लिंग) में तनाव हो पाने के अंदर कमी आ जाती है। कई बार कभी-कभी युवावस्था में भी लिंग (शिश्न) की नलियों में वसा के इकठ्ठे हो जाने के कारण से भी लिंग (शिश्न) के अंदर खून के उतार-चढाव की ताकत कम हो जाती है और पूर्ण रूप से शिश्न में उत्तेजना नहीं आ पाता है।

इंपोटेंसी के कारणः-

पुरुष के सेक्स क्रिया करते समय उसके लिंग (शिश्न) में पूर्ण रूप से तनाव नहीं आ पाता हैजिसकी वजह से पुरुष संभोग क्रिया नहीं कर पाता है यह इंपोटेंसी का मुख्य लक्षण होते हैं। लिंग (शिश्न) के अंदर दो प्रकार की नसें होती हैं-
1.धमनी.
2. शिरा।
जब धमनियों के अंदर ताजा खून जाता है तो उस समय लिंग (शिश्न) के अंदर सख्त तनाव आ जाता है और नसें उस जगह से पुराना खून ले जाती है। इसका मतलब यह है कि जब पुरुष की सेक्स क्रिया जागृत होती है तो उसकी धमनियां खुल जाती है और उसकी नसें बंद हो जाती है। नसों के बंद हो जाने की वजह से धमनियों में पहुचां हुआ खून बाहर नहीं निकल पाता और लिंग (शिश्न) तनकर सख्त हो जाता है। अगर किसी वजह से लिंग की नलिकाओं में खून का बहाव सही ढ़ग से नहीं हो पाता है तो लिंग के अंदर तनाव अथवा उत्तेजना नहीं हो पाती है। इस वजह से पुरुष के अंदर नपुंसकता रोग पैदा हो जाता है।

नपुंसकता के प्रकारः

नपुंसकता कई प्रकार से हो सकती है-
1.मानसिक नपुंसकताः- मानसिक नपुंसकता कई वजह से होती है जैसे- शरीर के अंदर किसी प्रकार की मानसिक चिंता, किसी प्रकार का डर, शरीर के अंदर गुस्सा आना, किसी चीज से नफरत करना, शर्म महसूस करना, किसीसे लड़ाई-झगड़े होने पर, लड़की के द्वारा पसंद न आना, किसी प्रकार का कोई काम न करने के कारण तथा आर्थिक समस्या के कारण भी मानसिक नपुंसकता पैदा हो जाती है।
2.मानसिक विकार से उत्पन्न नपुंसकताः- शरीर के अंदर किसी प्रकार का कोई तनाव, शिजोफ्रेनिया, मेनिया, किसी प्रकार की मानसिक चिंता तथामिरगीके कारण उत्पन्न नपुंसकता पैदा हो जाती है।
3.अत्यधिक मैथुन से पैदा हुई नपुंसकताः- अधिक मात्रा में शारीरिक संबंध बनाना, अधिकतर स्त्रियों के साथ संभोग क्रिया करना, बहुत अधिक मात्रा में हस्तमैथुन करना तथा अप्राकृतिक तरीके से मैथुन में मन लगाने से भी शरीर में नपुंसकता आ जाती है।
4.रोग के होने की वजह से नपुंसकताः- शूगर रोग के हो जाने के कारण,टी.बी.रोग के हो जाने के कारण, हाईब्लड़प्रैशर के होने के कारण, कोलेस्ट्राल तथा हाइड्रोसील का ऊचा स्तर बढ़ जाने के कारण से भी नपुंसकता जैसा रोग हो जाता है।
5.चोट लगने के कारण पैदा हुई नपुंसकताः- लिंग, दिमाग, रीढ़ की हड्डी, अण्डकोष तथा जननांग में खून का उतार-चढाव करने वाली नसों की जगह पर किसी प्रकार की चोट लगने के कारण से भी नपुंसकता पैदा हो जाती है।
6.दवाओं के प्रयोग से पैदा नपुंसकताः- पेट के दर्द, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, मानसिक रोग और एंटीबायोटिक आदि दवाओं का रोजाना इस्तेमाल करने से भी नपुंसकता का रोग पैदा हो जाता है।
7.यौन रोग से पैदा हुई नपुंसकता­- अण्डकोष में ट्यूमर का होना या कैंसर का होना, गानोरिया, मंपस या गंभीर रूप से शीतलामाता का होना, सिफलिश तथा वायरस के हमले से अण्डकोष पर जोर पड़ने की वजह से नपुंसकता में कमी आ जाती है।
8.नशीले पदार्थो के सेवन से पैदा हुई नपुसंकताः- कई नशीले पदार्थो के रोजाना इस्तेमाल करने से जैसे- भांग के सेवन से, गांजा के सेवन करने से, अफीम के सेवन से, चरस के सेवन से, मार्फीन, पैथोडीन, ब्राउन शुगर (स्मैक), धूम्रपान तथा शराब के सेवन करने से भी नपुंसकता आ जाती है।
9.हार्मोन के अंदर गड़बड़ी से पैदा हुई नपुंसकताः- सेरोटोनिन, टोस्टोस्टेरान, पी.ई.ए., वासोप्रेशिन, पिट्यूटरी, थाइमस, थाइराइड, विनियल, एड्रेनेलिन, गोनाड्स, लैंगर हैंस हार्मोन के बहाव में कमी तथा पैराथाइड के कारण से भी नपुंसकता में कमी आ जाती है।
10. काम विकृति से पैदा हुई नपुंसकताः- ट्रान्ससेक्सअलिज्म, ट्रान्सवेस्टिज्म, समलिंगी तथा सेक्सअल अनलिज्म के कारण भी नपुंसकता पैदा हो जाती है।
11.गलत बातों से पैदा हुई नपुंसकताः-पुरुषों के अंदर कई प्रकार से नपुंसकता के गुण पैदा हो जाते हैं जैसे- कई बार लिंग के छोटे-बड़े हो जाने के आकार को लेकर मन के अंदर कई प्रकार के भ्रम पैदा हो जाते हैं, अखबारों के अंदर दिए गए इस्तिहारों के द्वारा मन में कई प्रकार की आशंका पैदा हो जाना, मित्रों के द्वारा बताई गई गलत जानकारीके देने से, इधर-उधर की किताबों के द्वारा पढ़ी गई गलत जानकारी के देने से, योनि के आकारको लेकर मन में आई आशंका को लेकर भी नपुंसकतापैदा हो जाती है।
12.आपरेशन के होने के बाद शीघ्र बाद ही आई नपुंसकताः- प्रोस्टेट ग्लैंड के कारण, हर्नियाके आपरेशन के कारण, कमर के आपरेशन के कारण, हाइड्रोसील, दिमाग के आपरेशन के कारण तथा रीढ़ की हड्डी के आपरेशन के कारण और कैंसर के इलाज के लिए ली गई कीमो थेरेपी के कारण से भी नपुंसकता पैदा हो जाती है। 
13.वीर्य के नष्ट हो जाने के कारण से पैदा हुई नपुंसकताः- तेज चटपटे पदार्थो के अधिक इस्तेमाल करने से, खट्टे पदार्थो के सेवन से,  फास्ट फूड पदार्थो के सेवन से, अधिक गर्म पदार्थो के सेवन से, नमकीन पदार्थो के सेवन से तथा ठंडे पदार्थो (कोका-कोला) जैसे पदार्थो का अधिक सेवन करने से भी शरीर के अंदर नपुंसकता पैदा हो जाती है।
14.अन्य कारणों से भी नपुंसकता पैदा होनाः- सेक्स करते समय सही तरीके से सेक्स के बारे में मालूम न होना, स्त्री के साथ उम्र काबहुत ही ज्यादा अंतर होना, प्रौढ़ावस्था के अंदर सेक्स करना, संभोग क्रिया को करना एक बहुत ही बड़ा गलत कार्य समझना, सेक्स करते समय जल्दबाजी करना या छूप-छूप कर सेक्स करना,दूसरी स्त्रियों के साथ सेक्स संबंध बनाना, पूरी तरह से अपनी पत्नी का सेक्स करते समय साथ न मिलना, संभोग क्रिया करते समय जल्दी ही वीर्य के निकल जाने पर पत्नी के द्वारा धिक्कारना, अकेले शांत जगह परसेक्स क्रियानकरना तथा अपनी स्त्री पर शक पैदा करने के कारण से भी नपुंसकता पैदा हो जाती है।

नपुंसकता की किस तरह से पहचान करेः-

नपुंसकता को बड़ी ही आसानी से पहचाना जा सकता है जैसे- जब कोई पुरुष जगा हुआ होता है और उसके लिंग (शिश्न) में किसी भी प्रकार का कोई भी तनाव पैदा नहीं होता है और सोते समय उस के लिंग में बहुत ही सख्ती से तनाव पैदा हो जाता है तो उसे यह समझना चाहिए कि वह पुरुष नपुंसकता का रोगी हो गया है। लेकिन उसे यह भी जान लेना चाहिए कि यह कोई किसी प्रकार का शारीरिक विकार नहीं है तथा इस परेशानी को दूर भी किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण उपयोगः-

*.नपुंसकता रोग होने पर घबराना नहीं चाहिए। यह रोग किसी भी पुरुष को किसी भी उम्र में हो सकता है।*
यह बात बिल्कुल गलत है कि नपुंसकता का रोग होने के बाद पुरुष कोई भी कार्य करने में असमर्थ रहता है। नपुंसकता के रोग को समाप्त करने के लिए तो बहुत से उपाय है जिसको उपयोग में लाकर सेक्स का मजा लिया जा सकता है।
*.युवावस्था या प्रौढ़ावस्था के अंदर नपुंसकता के रोग की शिकायत होने पर इसको समाप्त करने के लिए और भी अन्य तरीके अपना सकते हैं।
*.नपुंसकता के रोग में एक तरीका कामयाब नहीं होने पर दूसरे तरह का उपाय अपना सकते हैं।
*.नपुंसकता का रोग अधिकतर शादी हो जाने के बाद अपने आप ही समाप्त हो जाता है।

सेक्स के बारे में कुछ-कुछ बातों के बारे मेंभी ज्ञान होना चाहिए जैसे-

संभोग क्रिया करते समय हमें किस तरह दिखना चाहिए, सेक्स करते समय हमें स्त्री के किन-किन कोमल अंगों का स्पर्श करना चाहिए, संभोग क्रिया करते समयहमें किन-किन आसनों का प्रयोग करना चाहिए तथा किस तरह पता लगाए कि स्त्री पूर्ण रुप सेसंतुष्ट हो चुकी है या नहीं आदि इस तरह के बारे में बताया जाता है कि जिसकी वजह से पुरुष के अंदर सेक्स करने की ताकत बढ़ती है। संभोग क्रिया के बारे में सही जानकारी हो जाने पर पुरुष के दिल से सेक्स के प्रति डर भाग जाता है। पुरुष की खत्म हुई सेक्स ताकत वापस आ जाती है तथा वह दुबारा से सेक्स करने के काबिल हो जाता है।

पत्नी का साथः-

अगर मानसिक नपुंसकता से परेशान पुरुष की पत्नी अगर अपने पति की सही ढ़ग से इलाज करे तो वह पुरुष शीघ्र ही ठीक हो सकता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को सेक्स करते समय सुख की प्राप्ति होने की बजाय अपनी पत्नी के खुश नहीं होने का डर बहुत ही अधिक परेशान करता है। यदि नपुंसकता के रोग से पीड़ित पुरुष की स्त्री संभोग क्रिया से निपटने के बाद अगर वह अपने पति से यह कह दें कि वह उससे प्रसन्न है तो नपुंसकता के रोग से पीड़ित उसके पति कीआत्मशक्ति और अधिक बढ़ जाती है। इस तरह से उसके अंदर संभोग करने की शक्ति भी काफी आ जाती है तथा दुबारा वह बहुत अधिक ज्यादा जोश और ताकत के साथ संभोग कर सकेगा। स्त्री का साथ मिल जाने से पुरुष में खोई हुई आत्मशक्ति वापस लौट आती है।



विभिन्न प्रकार से उत्पन्न नपुंसकता के रोग जैसे- यदि कोई रोगी पहले अधिक कामुक रहा हो और उसमें काम की इच्छा इतनी बढ़ जाती हो कि वह दूसरों को नंगा होकर लिंग दिखाता फिरता हो। यदि इससे व्यक्ति अत्यंत शक्तिहीन होकर नपुंसक हो गया हो और कामुक इच्छा तेज होने के बाद भी संभोग क्रिया में सफल नहीं हो पा रहा हो तो ऐसे में रोगी को फास्फोरस औषधि की 30 या 200 शक्ति का सेवन करना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति शारीरिक व मानसिक दोनों ही रूप से कामुक हो और इस कारण से नपुंसकता आ गई हो तो ऐसे रोगी के इस रोग का उपचार करने के लिए फास्फोरस औषधि की 30 से 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
अधिक हस्तमैथुन के करने से यदि नपुंसकता आई हो तो भी इस औषधि का सेवन करना चाहिए। यदि व्यक्ति सामान्य तौर पर उत्तेजित होता है और अंडकोषों की आभ्यन्तर शिथिलता के कारण नपुंसकता आई हो तो उसे कोनायम औषधि का सेवन करना चाहिए।
लाइकोपोडियम :-
नपुंसकता के रोग में यह औषधि अत्यंत लाभकारी मानी गई है। एक व्यक्ति जो दो या तीन शादियां करता है और अपने नपुंसकता के कारण बच्चे पैदा करने में असमर्थ हो होता है जो उसके लिए बड़ी परेशानी की बात है। ऐसे में नपुंसकता को दूर करने के लिए लाइकोपोडियम औषधि अधिक लाभकारी होती है। नपुंसकता के लक्षणों में रोगी को लाइकोपोडियम औषधि की 30, 200 या 1m मात्रा का सेवन करना चाहिए। हस्तमैथुन या यौन कुकर्मों के कारण नपुंसकता हो जाने पर भी इस औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है। यदि लिंग छोटा रह गया हो, काम उत्तेजना अधिक होती हो, कभी-कभी उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि उसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो जाता है। रोगी में अधिक कामवासना के कारण शक्तिहीनता आ जाती है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को लाइकोपोडियम औषधि का सेवन करना चाहिए। ऐसे ही लक्षण में इस औषधि की निम्न शक्ति का भी सेवन किया जा सकता है और लाभ न होने पर उच्च शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।
ऐसे व्यक्ति जो युवावस्था के दौराना अधिक कामुक जीवन व्यतित किया हो और 60 साल की आयु में भी उसकी यौन-दृष्टि उतना ही उत्तेजित हो जितना युवावस्था में। वह शारीरिक दृष्टि से असमर्थ हो और नपुंसकता के कारण अपने आप वीर्यपात होता हो तो उसके लिए ऐगनस-कैस्टस औषधि की 1 या 6 शक्ति उपयोगी होगी।
यदि किसी व्यक्ति में अत्यंत कामोत्तेजना हो तो उसे यह औषधि लेनी चाहिए। यदि रोगी को संभोग करते समय आनन्द नहीं मिलता या संभोग करते समय वीर्यपात नहीं होता जिसके कारण कामक्रिया के बाद रोगी को बहुत परेशानी होती है। इस तरह के नपुंसकता को दूर करने के लिए ग्रैफाइटिस औषधि की 30 या 200 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
अधिक संभोगक्रिया के कारण होने वाले नपुंसकता को दूर करने के लिए नक्स-वोमिका, सल्फर और कैलकेरिया कार्ब तीनों औषधि का प्रयोग किया जाता है। कैलकेरिया कार्ब औषधि का प्रयोग रोगी में उत्पन्न ऐसी स्थिति में किया जाता है जिसमें रोगी में अधिक विषय वासना होती है परन्तु यह वासना केवल मानसिक होती है और शारीरिक वासना कम होती है अर्थात रोगी में काम की इच्छा होती है परन्तु उस कामक्रिया में शारीरिक क्रिया की इच्छा नहीं होती है। ऐसे में यदि रोगी काम क्रिया करता भी है तो लिंग ढीला पड़ जाता है या संभोग के समय जल्दी वीर्यपात हो जाता है या संभोग से पहले वीर्यपात होता है या वीर्यस्राव अधुरा होता है। ऐसे में कैलकेरिया कार्ब औषधि की 30 या 200 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है। इस तरह नपुंसकता के कारण कभी-कभी व्यक्ति निराश होकर एकांत में रहना पसंद करने लगता है। यदि वह कामक्रिया करने की इच्छा भी करता है तो उसके सिर में दर्द होता है, टांगों में शक्ति नहीं रहती एवं टांगों में कमजोरी आ जाती है। इस तरह के लक्षणों को दूर करने में कैलकेरिया कार्ब औषधि का उपयोग करना लाभकारी होता है।
यदि अधिक संभोग क्रिया के कारण से रोगी को कमजोरी आ गई हो, वह सोना चाहता है परन्तु सोकर उठने के बाद भी कमजोरी बनी रहती है। रोगी को किसी प्रकार की स्नायु सम्बंधी थकावट महसूस नहीं होती। हस्तमैथुन, स्त्रीसहवास या स्वप्नदोष होने के बाद उसका स्वास्थ्य और भी खराब हो जाता है। वीर्यपात के कारण से रोगी अधिक चिड़चिड़ा हो जाता है, ठीक से सोच-विचार नहीं कर पाता, सिर दर्द होता रहता है, रीढ़ की हड्डी में कमजोरी आ जाती है और ऐसा लगता है कि उसमें लकवा मार गई हो, प्रोस्टेट का स्राव अपने आप होने लगता है, नींद में अश्लील सपने आने पर वीर्य पात हो जाता है, पेशाब तथा मलत्याग करने के समय वीर्य निकल जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सेलेनियम औषधि की 30 शक्ति या सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि जननेन्द्रिय में ठंडापन महसूस हो और लिंग में सिकुड़न हो तो उपचार के लिए सल्फर औषधि का उपयोग करना लाभदायक होता है।
संभोग क्रिया का पूर्ण आनन्द पाने के लिए कुछ आवश्यक बाते हैं :-
अधिकतम संतुष्टि पाने के लिए धीरे-धीरे क्रिया करें। सामान्य व्यायाम उर्जा स्तर को बढ़ाने में प्रोत्साहित करता है, वह शारीरिक क्षमता को भी बढ़ाता है। योग, ध्यान व मालिश से तनाव दूर होता है। नपुंसकता की समस्या को धैर्य पूर्वक सहभागी की समझदारी बढ़ा कर सुलझाने की कोशिश करें।
हस्तमैथुन के कारण बाद में नपुंसकता आ जाती है। नपुंसकता की मुख्य समस्या जननेन्द्रिय की नहीं होती है बल्कि व्यक्ति के दिमाग में होती है। अत: नपुंसकता से बचने के लिए तनाव मुक्त रहें और मन में गंदी सोच को न आने दें। इस तरह तनाव मुक्त होकर संभोग क्रिया करने से सम्पूर्ण आनन्द आपको मिल सकता है। संभोग क्रिया करते समय यह बात महत्वपूर्ण नहीं है कि लिंग की लम्बाई कितनी है क्योंकि यौन क्रिया के लिए योनि की शुरू की कुछ इंच ही संभोग क्रिया के लिए है। लेकिन संभोग के समय जल्दी वीर्यपात हो जाना अवश्य ही एक समस्या है। ऐसे में संभोग क्रिया का पूर्ण आनन्द लेने के लिए संभोग करते समय ऐसा महसूस हो कि वीर्य निकलने वाला ही है तो उसी समय अपने साथी को कहे कि वह आपके लिंग के नीचे के भाग को दबाकर रखें। ऐसा करने से कुछ देर के लिए वीर्य निकलना बंद हो जाएगा। इस तरह संभोग क्रिया करने से पूर्ण आनन्द मिलता है।


(टिप- यह जानकारी सिर्फ संदर्भ के लिये दि गयी कोई भी दवा लेने से पूर्व डॉक्टर कि सलाह आवश्यक है)




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