सफ़ेद दाग अथवा विटिलिगी अथवा ल्युकोडरमा या फुलेरी एक ही बीमारी के कई नाम हैं।
सफेद दाग के कारण
यह रोग त्वचा द्वार ‘मिलेनिन’ नामक पदार्थ (जो कि त्वचा का रंग निर्धारित करता है) का बनना बंद हो जाने के कारण होता है, लेकिन त्वचा ग्रंथियों एवं कोशिकाओं में ऐसी कौन-सी खराबी आ जाती है कि मिलेनिन का बनना रुक जाता है, यह अभी तक अबूझ पहेली ही है। यह अण्डाकार अथवा छितरे हए धब्बों के रूप में शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें किसी प्रकार की खुजली अथवा अन्य कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। अब वैज्ञानिक यह मानने लगे हैं कि संभवतया मानसिक दबाव के साथ-साथ थायराइड ग्रंथि से संबंधित बीमारियों में शरीर के ऊतकों में किसी वजह से कठोरता एवं सिकुड़ाव आ जाने के कारण,गंजापन होने के कारण एवं खून की कमी होने पर सफेद दाग के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। सिफिलिस रोग की वजह से भी सफेद दाग बन सकता है।
सफेद दाग का होमियोपैथिक इलाज
वैसे, व्यक्ति के हाव-भाव, आचार-विचार, पूर्व इतिहास, खान-पान आदि को देखते हुए समान लक्षणों के आधार पर कोई भी दवा दी जा सकती है, किन्तु निम्न दवाएं उपयोगी हैं – ‘एल्युमिना’, ‘आर्सेनिक एल्बम’, ‘नेट्रमम्यूर’, ‘सीपिया’, ‘साइलेशिया’, ‘सल्फर’, ‘कैल्केरिया कार्ब’, ‘काबोंएनीमेलिस’, ‘मरक्यूरियस’, ‘एसिडफास’, ‘माइका’, ‘हाइड्रोकोटाइल’, ‘क्यूप्रम आर्स’, ‘कालमेग’, ‘चेलीडोनियम’।
सम्पूर्ण बातें रोगी से जानने के बाद एक व्यवस्थित मानसिक एवं शारीरिक आधार पर खोजी गई दवा अत्यन्त उपयोगी है, जिसे होमियोपैथी की भाषा में कान्सटीट्यूशनल रेमेडी कहते हैं। फिर बीमारी के कारणों के आधार पर दवा देते हैं, जैसे किसी रोग में ताम्र धातु का अभाव परिलक्षित होने पर ‘क्यूप्रम आर्स’ 3 × दवा, यकृत संबंधी परेशानियों के साथ सफेद दाग होने पर ‘कालमेग’, ‘चेलीडोनियम’ दवाओं का अर्क, पेट की गड़बड़ी के साथ सफेद दाग होने पर ‘वेरवोनिया’ दवा का अर्क एवं ‘क्यूप्रम आक्स नाइग्रम’ दवा, सिफिलिस रोग होने पर ‘सिफिलाइनम’ नामक दवा दी जा सकती है।
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि सफ़ेद दागकोई गंभीर रोग नहीं है | हालाँकि यह जरूरी है कि इसके लिए हम सचेत रहें क्योंकि इसका उपचार किया जा सकता है|
(टिप- यह जानकारी सिर्फ संदर्भ के लिये दि गयी कोई भी दवा लेने से पूर्व डॉक्टर कि सलाह आवश्यक है)
सफेद दाग की संपूर्ण जानकारी या ट्रीटमेंट के लिये संपर्क करे-
संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि सफ़ेद दागकोई गंभीर रोग नहीं है | हालाँकि यह जरूरी है कि इसके लिए हम सचेत रहें क्योंकि इसका उपचार किया जा सकता है|
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